सिंधु सभ्यता : एक परिचय
- सिंधु सभ्यता की खोज रायबहादुर दयाराम साहनी ने की।
- सिंधु सभ्यता को प्रकतिहाशिक अथवा कांस्य युग में रखा जा सकता ह।
- सिंधु सभ्यता के सर्वाधिक पश्चिमी पुरास्थल सुतकागेंडोर , पूर्वी पुरास्थल आलमगीरपुर , उतरी पुरास्थल मंदा तथा दक्षिणी पुरास्थल डाइमबाद है।
- सिंधु सभ्यता नगरीय सभ्यता थी।
- लोथल एवं सुतकोतदा - सिंधु सभ्यता का बंदरगाह था।
- जुटे हुए खेत एवं नकसीदार ईटीओ के प्रयोग का साक्ष्य कालीबंगन से प्राप्त हुआ है।
- मोहनजोदड़ो से प्राप्त अनागर सम्भवता सभ्यता की सबसे बड़ी इमारतों में से एक थी।
- मोहनजोदडो से प्राप्त बृहत् स्नानघर एक प्रमुख स्मारक है।
- अग्निकुंड लोथल एवं कालीबंगन से प्राप्त हुआ है।
- मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक शील पर तीन मुख वाले देवता (पशुपति नाथ ) की मूर्ति मिली है।
- मोहनजोदड़ो से नर्तकी की एक कांस्य मूर्ति मिली है।
- सिंधु सभ्यता की लिपि भावचित्रात्मक है। यह लिपि दाए से बाय ओर लिखी जाती थी।
- सिंधु सभ्यता के लोगो ने नगरों तथा घरो के विनयस के लिए ग्रिड पद्धिति अपनायी।
- सिंधु सभ्यता में मुख्या फसल थी - गेहू और जो।
- आग में पाकी हुई मिटटी को टेराकोटा कहा जाता है।
- पर्दा प्रथा एवं वेश्यावृति सैंधव सभ्यता में प्रचलित थ्री।